आनंदमयी माँ कहती हैं—
“जपने वाला, नाद, मंत्र और परमात्मा—यह एक ही हैं।”
जब हम “राम राम” कहते हैं, तो ऐसा नहीं है कि राम का नाम लेने के बाद कभी आगे जाकर राम मिलेंगे।
जब “राम राम” कहा जा रहा है, वही राम हैं।
जप करते समय केवल शब्द पर नहीं, उसके नाद पर ध्यान देना है। “राम राम” के भीतर जो स्पंदन है, उसे सुनना है और उसमें गहराई में जाना है।
नाद अपने आप मन को शांत कर देता है।
भटकाते कई शब्द हैं, लेकिन नाद सारे भटके हुए शब्दों को एक नाद बना देता है।
इसलिए जपने वाला, मंत्र, नाद और परमात्मा अलग-अलग नहीं हैं—ये एक ही हैं।