परमात्मा की बनाई हुई इस दुनिया को छोड़कर जाने की इच्छा करने के बजाय, उसकी बनाई हुई हर चीज़ का आनंद लेना चाहिए।
कोई कलाकार जब कोई सुंदर रचना बनाता है, तो उसे सबसे ज्यादा आनंद तब मिलता है जब कोई उसकी कला को देखकर कहता है—“आहा! प्रभु, क्या सुंदर चीज़ बनाई है।”
लेकिन हम क्या कर रहे हैं? हम कहते हैं—“यह तो माया है, इसे छोड़कर जाना है।”
परमात्मा से जुड़ने का एक तरीका यह भी है कि उसकी बनाई हुई हर कृति का आनंद लें और उसे appreciate करें।
आज का सुंदर दिन देखकर कहें—“आहा! प्रभु, क्या सुंदर दिन बनाया है।”
यह भी कह सकते हैं—“प्रभु, मुझे 10–12 जन्म और देना, ताकि आपकी इस कलाकृति का मैं और आनंद ले सकूं।”
यह नहीं कि मुक्ति कब होगी? मोक्ष कब होगा?
परमात्मा को कितनी तकलीफ होती होगी जब हम कहते हैं—“मुक्ति दे दो।”
जैसे वह कह रहा हो—“मेरी फिल्म पसंद नहीं आई क्या? आनंद तो लो।”
हम यहाँ उसकी बनाई हुई इस सुंदर रचना का आनंद लेने आए हैं।