राम-जप को तीन तरह से किया जा सकता है।
पहला है बहुत धीमे, मन के अंदर राम-राम का जाप करना। इसमें शब्दों के बीच थोड़ा अंतर रखते हुए जप करना है।
दूसरा है धीरे-धीरे फुसफुसाकर राम-राम कहना। इसमें गले को थोड़ा सा संकुचित करके, एक लय में राम-राम का उच्चारण किया जाता है।
तीसरा है ऊँचे स्वर में राम-राम का जाप करना।
कलियुग में चारों तरफ बहुत शोर है। इसलिए ऊँचे स्वर में राम का नाम लेना भी बताया गया है।
राम का नाम लेते हुए केवल शब्दों पर ध्यान नहीं रखना है, बल्कि उसके नाद और स्पंदन को महसूस करना है।
जप करते-करते जब ध्यान नाद पर चला जाता है, तो मन उसी में टिकने लगता है।