संसार एक लहर है और परमात्मा समुद्र है।
हम लहरों को देखते रहते हैं—कोई पेड़ है, कोई पहाड़ है, कोई बादल है, कोई इंसान है। ये सब उस विशाल समुद्र की लहरें हैं।
लहर को देखते-देखते हम समुद्र को भूल जाते हैं।
अध्यात्म का मतलब है कि लहरों के पीछे जो समुद्र है, उसे देखना शुरू करें।
संसार की हर चीज़ को देखते हुए उस समुद्र को याद करें, क्योंकि जो दिखाई दे रहा है, वह लहर है और उसके पीछे वही समुद्र है।
ध्यान लहर पर नहीं, समुद्र पर होना चाहिए।